मीठे खजूर, खट्टे अंगूर

ताना मारते उसने कहा: “सुनिये जी हज़ूर,
कामयाब हुये तो क्या हुआ, मत करो इतना गुरूर|
बड़े हुए तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर,
पंथी को छाया नहीं, फल लगे अति दूर !”

कुछ सोचके मैंने दिया जवाब,
किया बिचारे का हाल ख़राब:
“छोटी सोच तो क्या हुआ, जैसे कोई लंगूर,
एदे तेदे छलांग मारके, खाओगे कभी तुमभी खजूर |
देखा नही अगर किसीने, तो केहेलायेंगे तुमभी हज़ूर
वर्ना खजूर थे बेकार, जैसे खट्टे कोई अंगूर !”

दीपक हेगड़े

Advertisements

1 Response to मीठे खजूर, खट्टे अंगूर

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s